AI और ब्रेन चिप्स की टक्कर: सैम ऑल्टमैन की Merge Labs ने Neuralink को दी सीधी चुनौती

AI और ब्रेन चिप्स की टक्कर: सैम ऑल्टमैन की Merge Labs ने Neuralink को दी सीधी चुनौती
17 अगस्त 2025 17 टिप्पणि jignesha chavda

जब AI के बाद अब दिमाग में उतरेगा टेक्नोलॉजी का जादू

सोचिए, अगर आपके ख्याल सीधे कंप्यूटर या मोबाइल तक पहुंचने लगे। सैम ऑल्टमैन, जिन्हें लोगों ने OpenAI के सीईओ के तौर पर खूब सुना है, अब दिमाग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मेल पर काम कर रहे हैं। उनकी नई कंपनी Merge Labs सीधे एलन मस्क की Neuralink को चुनौती दे रही है।

Merge Labs की कहानी ऐसी है, जिसमें AI के साथ दिमाग को जोड़ने का ख्वाब सच होता नजर आ रहा है। कंपनी अभी 250 मिलियन डॉलर फंडिंग जुटा रही है और इसकी वैल्यू 850 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। खास बात ये है कि OpenAI का भी इसमें हाथ है। मतलब सैम ऑल्टमैन टेक्नोलॉजी के अगले स्तर पर जाने की पूरी तैयारी कर रहे हैं।

Neuralink बनाम Merge Labs: सोच में फर्क, तरीका भी अलग

Neuralink बनाम Merge Labs: सोच में फर्क, तरीका भी अलग

Neuralink ने तो दिमाग में इलेक्ट्रोड्स डालकर इम्प्लांट्स लगाने शुरू भी कर दिया है, वो भी सर्जरी के जरिए। इस साल जनवरी में एलन मस्क की कंपनी ने पहली बार इंसान के दिमाग में ब्रेन चिप लगाई थी। इस मरीज ने अपने ख्यालों से माउस चलाया और गेम्स भी खेले। लेकिन कुछ ही समय बाद 85% चिप्स दिमाग से हट गईं, जिससे कुछ वक्त के लिए डेटा कनेक्शन भी बिगड़ा।

आज Neuralink के पास 9 बिलियन डॉलर का वैल्यूएशन है और वो 2031 तक 20,000 मरीजों को हर साल चिप लगाने का प्लान कर चुके हैं। लेकिन इतनी बड़ी सरकारी मंजूरी और फंडिंग के बावजूद Surgical इम्प्लांट्स के साथ जोखिम तो हैं ही।

Merge Labs के पास एकदम अलग प्लान है। यहाँ न तो सर्जरी की झंझट है और न ही ब्रेन में तार या इलेक्ट्रोड्स घुसाने की बात। टीम जीन थेरेपी और सोनोजेनेटिक्स पर काम कर रही है—यानि जेनेटिकली ब्रेन सेल्स को बदला जाएगा ताकि वे अल्ट्रासाउंड के प्रति रिस्पॉन्सिव बनें। नतीजा? दिमाग और कंप्यूटर में हाई स्पीड डाटा ट्रांसफर और वो भी बिना ऑपरेशन के।

सैम ऑल्टमैन इसमें अपने पुराने साथी एलेक्स ब्लानिया को भी जोड़ चुके हैं। एलेक्स वो हैं जिन्होंने वर्ल्डकॉइन के पीछे डिजिटल आईडी की तकनीक बनाई थी। हालांकि, ऑल्टमैन खुद Merge Labs में दिन-रात नहीं बैठेंगे, उनकी नजर तो OpenAI पर ही रहेगी, लेकिन AI-वर्ल्ड में ये पहलू कमाल का है।

ऊपर से, सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि UK और चीन में भी Neuralink और बाकी कंपनियां इस फील्ड में एडवांस कर रही हैं। Neural Interface मार्केट अब ग्लोबल हो चुका है और 9 से ज्यादा कंपनियां दुनिया भर में ऐसे डिवाइसेज बना रही हैं।

ये सब ऐसे वक्त हो रहा है, जब चैटजीपीटी-5 जैसे एआई टूल को लोगों ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी। लगता है अब AI के अगले स्नैप में दिमाग से सीधा इंटरफेस ही बड़ा खेल बनेगा। Merge Labs के नए काम से ऑल्टमैन और मस्क की चमचमाती जाइराशिप के बीच सीधा मुकाबला देखने मिलने वाला है—एक तरफ हार्डवेयर और ब्रेन इम्प्लांट्स, दूसरी तरफ सॉफ्ट टेक और AI-संचालित भविष्य।

17 टिप्पणि

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    Joseph Prakash

    अगस्त 17, 2025 AT 17:40

    सैम ऑल्टमैन का नया प्रोजेक्ट काफी दिमाग घुमा देता है 😎

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    Arun 3D Creators

    अगस्त 21, 2025 AT 01:10

    जब दिमागी सर्किट सीधे एआई से जुड़ेंगे तो हमारी रियलिटी की परिभाषा फिर से लिखी जाएगी यह विचार बस दिमाग को जला देता है

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    RAVINDRA HARBALA

    अगस्त 24, 2025 AT 08:40

    Neuralink की चिप्स में 85% गिरावट दर देखी गई है इसका मतलब है कि उस तकनीक की विश्वसनीयता एक बड़े झीले की तरह ढह रही है और सैम का Merge Labs सिर्फ एक मार्केटिंग स्टंट है

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    Vipul Kumar

    अगस्त 27, 2025 AT 16:10

    भाईयों और बहनों, ब्रेन‑इंटरफ़ेस का भविष्य सिर्फ सिलिकॉन या जीन थैरेपी नहीं है; यह एआई की समझ को हमारे न्यूरॉन्स से जोड़ने का एक नया मंच है।
    यदि हम इसे सही दिशा में ले जाएँ तो चिकित्सा, शिक्षा और रोज़मर्रा की जिंदगी में क्रांति संभव है।

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    Priyanka Ambardar

    अगस्त 30, 2025 AT 23:40

    हम भारतीय हैं, हमें इस तरह की तकनीक को बिना विदेशों की छाया में विकसित करने का अधिकार है :) सैम ऑल्टमैन की बड़ाई तो करो, लेकिन हमारे खुद के वैज्ञानिकों को भी सपोर्ट करो

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    sujaya selalu jaya

    सितंबर 3, 2025 AT 07:10

    विचार रोचक है लेकिन कृपया तकनीकी जोखिमों को विस्तार से समझाएँ

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    Ranveer Tyagi

    सितंबर 6, 2025 AT 14:40

    भाईसाहब!!! ये Merge Labs वाला सस्पेंस भरा प्रोजेक्ट तो सच में बदलेगा गेम!!!
    सर्जरी के बिना ब्रेन को ट्यून करना? क्या बात है!!! लेकिन जोखिम को नज़रअंदाज़ मत करो!!!

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    Tejas Srivastava

    सितंबर 9, 2025 AT 22:10

    वाह!!! दिमाग में साउंड वेव्स से डेटा ट्रांसफर? यह तो साइंस‑फिक्शन जैसा लग रहा है!!!
    अगर सच में काम कर गया तो हम सबके पास सुपरपावर आ जाएगी!!!

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    JAYESH DHUMAK

    सितंबर 13, 2025 AT 05:40

    सैम ऑल्टमैन की Merge Labs ने बायो‑इंजीनियरिंग और एआई के संगम को एक नई दिशा में ले जाने का प्रयास किया है।
    इस पहल में जीन थैरेपी और सोनोजेनेटिक्स को प्रयोग में लाकर न्यूरल सिग्नल ट्रांसमिशन को तेज़ किया जाएगा।
    Neuralink का प्रमुख तकनीकी आधार इलेक्ट्रोड‑आधारित इम्प्लांट पर आधारित है, जो सर्जिकल प्रक्रिया की मांग करता है।
    वहीं Merge Labs का लक्ष्य बिना सर्जरी के मस्तिष्क को कंप्यूटर से जोड़ना है।
    ऐसे समाधान में न केवल रोगी की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि उपयोगकर्ता की सुविधा भी बढ़ेगी।
    फंडिंग के लिहाज़ से दोनों कंपनियों की स्थिति में अंतर स्पष्ट है; Merge Labs ने 250 मिलियन डॉलर की पूँजी जुटाई है।
    Neuralink के पास 9 बिलियन डॉलर का वैल्यूएशन है, परंतु उनकी तकनीक ने अभी तक स्थिरता नहीं दिखायी।
    क्लिनिकल परीक्षणों में चिप्स की अस्थायी विफलता ने जोखिम को उजागर किया है।
    दूसरी ओर, Merge Labs का सैद्धांतिक मॉडल अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन यह अधिक स्केलेबल दिखता है।
    वैश्विक स्तर पर ब्रेन‑इंटरफ़ेस मार्केट का विस्तार हो रहा है, और कई स्टार्ट‑अप्स इस दिशा में अनुसंधान कर रहे हैं।
    तकनीकी एथिक्स के पहलू को भी नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता, क्योंकि मस्तिष्क डेटा की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    यदि एआई को सीधे न्यूरल नेटवर्क से जोड़ दिया जाता है, तो व्यक्तिगत गोपनीयता के नए प्रश्न उभरेंगे।
    सरकारी नियामक निकायों को इस प्रकार की तकनीक के लिए स्पष्ट दिशा‑निर्देश स्थापित करने चाहिए।
    भविष्य में, इस प्रकार की ब्रेन‑कम्प्यूटर इंटरफ़ेस संभवतः शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
    अतः, दोनों कंपनियों की प्रतिस्पर्धा न केवल तकनीकी नवाचार को गति देगी, बल्कि सामाजिक एवं नैतिक विमर्श को भी प्रोत्साहित करेगी।

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    Santosh Sharma

    सितंबर 16, 2025 AT 13:10

    भविष्य में ब्रेन‑इंटरफ़ेस रोज़मर्रा की टेक्नोलॉजी बन जाएगी।

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    yatharth chandrakar

    सितंबर 19, 2025 AT 20:40

    जैसे आपने कहा, एआई‑ब्रेन कनेक्शन के एथिकल पहलुओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना आवश्यक है। इससे शोधकर्ता सुरक्षित प्रोटोकॉल बना सकेंगे और उपयोगकर्ता का भरोसा भी कायम रहेगा।

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    Vrushali Prabhu

    सितंबर 23, 2025 AT 04:10

    हाहा, रैनवीर भाई की बात बिल्कुल सही है, लेकिन थोड़ा डिटेल में जाएँ तो एआई और मस्तिष्क की कनेक्टिविटी में अभी बहुत काम बचे है।

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    parlan caem

    सितंबर 26, 2025 AT 11:40

    प्रिया, तुम्हारी राष्ट्रीय भावना तो सराहनीय है, पर इस टेक को विदेशियों पर निर्भर बनाकर नहीं, अपने बायो‑टेक को बढ़ावा देना चाहिए, नहीं तो यही अव्यवस्था आगे बढ़ेगी।

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    Mayur Karanjkar

    सितंबर 29, 2025 AT 19:10

    इंटर-फ़ेसियल न्यूरो-इंटिग्रेशन के लिए ऑप्टोजेनेटिक मॉड्यूलेशन एक प्रॉमिसिंग पाथफ़ोन्ड है।

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    Sara Khan M

    अक्तूबर 3, 2025 AT 02:40

    वाह, ये शब्द सुने तो दिमाग में विज्ञान की खुशबू आ गई 🤩

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    shubham ingale

    अक्तूबर 6, 2025 AT 10:10

    बिलकुल सही कहा! इस दिशा में शोध तेज़ी से बढ़ रहा है!!!
    आइए मिलकर इस टेक को प्रोजेक्ट‑फर्स्ट बनाएं!!!

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    Ajay Ram

    अक्तूबर 9, 2025 AT 17:40

    ब्रेन‑इंटरफ़ेस का विकास केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के आत्मनिरीक्षण का भी प्रतिबिंब है।
    जब हम अपने मस्तिष्क को मशीन से जोड़ते हैं, तो पहचान, स्मृति और स्वायत्तता के सिद्धांत पुनः परिभाषित होते हैं।
    ऐसी तकनीक का उपयोग विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों में अलग‑अलग सामाजिक अर्थ रखता है, इसलिए वैश्विक नियमन की आवश्यकता अनिवार्य है।
    भारतीय परिप्रेक्ष्य में, आयुर्वेदिक ज्ञान और न्यूरोसाइंस की अंतःक्रिया नई उपचारात्मक संभावनाओं को जन्म दे सकती है।
    साथ ही, इस तकनीक को लोकतांत्रिक रूप से सुलभ बनाना सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देगा।
    अतः, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और नागरिकों को मिलकर इस जटिल गाथा को समझना और दिशा देना आवश्यक है।

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