संसद में दूरसंचार: 5G रोलआउट, 4 लाख करोड़ निवेश और ग्रामीण डिजिटल अंतर

संसद में दूरसंचार: 5G रोलआउट, 4 लाख करोड़ निवेश और ग्रामीण डिजिटल अंतर
27 मई 2026 0 टिप्पणि jignesha chavda

संसद की हालिया बैठक में एक ऐसा सवाल उठा जिसने भारत सरकार के दूरसंचार विभाग को आंकड़ों से जवाब देने पर मजबूर कर दिया। वहाँ पेश किए गए तथ्य चौंकाने वाले हैं: पिछले 22 महीनों में पूरे देश में 5G नेटवर्क का रोलआउट किया गया है, लगभग 5 लाख बेस ट्रांसमीटर स्टेशन (BTS) स्थापित किए गए हैं, और टेलीकॉम कंपनियों द्वारा 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

एक ओर जहाँ मंत्रालय गर्व से बता रहा है कि आज देश में 1.2 बिलियन (120 करोड़) मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर सांसदों ने यह शिकायत उठाई कि कई जगहों पर तो टावर दिखते हैं, सिग्नल भी फुल दिखाई देता है, लेकिन कॉल कनेक्ट ही नहीं होती। यही वह बिंदु है जहाँ 'डेटा' और 'जमीनी हकीकत' के बीच की खाई स्पष्ट हो जाती है।

शहर बनाम गाँव: डिजिटल असमानता का सच

बैठक के दौरान सामने आए आंकड़े एक गहरी असमानता को रेखांकित करते हैं। एक सांसद ने नोट किया कि शहरी क्षेत्रों में टेली-डेंसिटी (प्रति 100 लोगों पर कनेक्शन) 131 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या केवल 58 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि शहरों में हर व्यक्ति के पास औसतन एक से ज्यादा कनेक्शन हैं, जबकि गाँवों में यह पहुँच अभी भी सीमित है।

हालाँकि, कुछ राज्यों ने इस दिशा में प्रगति दर्ज की है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र ने ग्रामीण वाई-फाई कनेक्टिविटी के मामले में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। वहाँ लगभग 7,000 कनेक्टिविटी स्पॉट्स स्थापित किए गए हैं, जो कुल राष्ट्रीय संख्या (लगभग 92,000) का एक हिस्सा हैं। फिर भी, बड़ी तस्वीर यह है कि ग्रामीण डिजिटल विभाजन अभी भी एक बड़ा चुनौती है।

5G का तेज़ी से विस्तार और भविष्य की योजना

केंद्रीय मंत्री, दूरसंचार विभाग ने घोषणा की कि 22 महीनों के भीतर पूरे देश में 5G तकनीक लागू कर दी गई है। वर्तमान में, लगभग 40 करोड़ सब्सक्राइबर 5G सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर 100 करोड़ (1 बिलियन) हो जाए।

यह विस्तार केवल शहरों तक सीमित नहीं है। मंत्री ने बताया कि लगभग 5 लाख गाँव पहले ही 5G कनेक्टिविटी के दायरे में आ चुके हैं। साथ ही, शेष लगभग 10,000 गाँवों को '4G सैचुरेशन प्रोजेक्ट्स' के तहत कवर किया जा रहा है, जिनमें Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) को प्राथमिकता दी गई है। उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में पूरा देश 4G सेवाओं से जुड़ जाएगा।

निजी खिलाड़ियों की भूमिका और गुणवत्ता की चिंताएं

निवेश की बात करें तो टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (TSPs) द्वारा 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसमें Bharti Airtel Limited जैसे निजी खिलाड़ियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। लेकिन गुणवत्ता का मुद्दा अनसुला remains।

एक सांसद ने विशेष रूप से BSNL और Airtel के टावरों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "कई जगहों पर दोनों कंपनियों के टावर मौजूद हैं, फोन पर पूर्ण नेटवर्क सिग्नल दिखाई देता है, लेकिन कॉल कनेक्ट नहीं होती।" यह समस्या नेटवर्क प्लानिंग, क्षमता और बैकहॉल (backhaul) की कमी को इंगित करती है। सिर्फ टावर लगाने से काम नहीं चलता; डेटा ट्रैफिक को संभालने वाली बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।

ऊर्जा आपूर्ति और भारतनेट परियोजना

ऊर्जा आपूर्ति और भारतनेट परियोजना

टावरों को चलाने के लिए बिजली की समस्या को सुलझाने के लिए, सरकार ने हाल ही में पहली बार लगभग 40,000 बैटरियों और पावर प्लांट्स का ऑर्डर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी क्षेत्र में बिजली कनेक्शन न भी हो, तो भी ये बैकअप पावर सोर्स हर टावर को संचालित रख सकें।

ग्रामीण इंटरनेट पहुँच के लिए भारतनेट परियोजना की भूमिका अहम है। बुलंदशहर जैसे संसदीय क्षेत्रों में पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का काम सुचारू रूप से चल रहा है। 'डिजिटल भारत' की दृष्टि के तहत, हर गाँव तक इंटरनेट पहुँचाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है।

Frequently Asked Questions

भारत में 5G नेटवर्क की वर्तमान स्थिति क्या है?

पिछले 22 महीनों में पूरे देश में 5G रोलआउट किया गया है। वर्तमान में लगभग 40 करोड़ सब्सक्राइबर 5G का उपयोग कर रहे हैं और लगभग 5 लाख गाँव 5G कनेक्टिविटी से जुड़े हुए हैं। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इस संख्या को 100 करोड़ तक ले जाना है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में टेली-डेंसिटी में क्या अंतर है?

शहरी क्षेत्रों में टेली-डेंसिटी 131 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि प्रति 100 लोगों पर 131 कनेक्शन हैं। इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या केवल 58 प्रतिशत है, जो डिजिटल विभाजन को दर्शाती है।

क्या BSNL और Airtel के टावर होने के बावजूद कॉल ड्रॉप की समस्या क्यों है?

सांसदों ने उठाए गए मुद्दे के अनुसार, कई जगहों पर भौतिक टावर और सिग्नल तो मौजूद हैं, लेकिन नेटवर्क क्षमता या बैकहॉल कनेक्टिविटी की कमी के कारण कॉल कनेक्ट नहीं हो पातीं। यह नेटवर्क प्लानिंग और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या है।

टावरों की बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

सरकार ने लगभग 40,000 बैटरियों और पावर प्लांट्स का ऑर्डर दिया है ताकि बिजली कटौती के दौरान भी टावर संचालित रह सकें। यह कदम नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।