एफआईआर क्या है और कब दर्ज करानी चाहिए?

क्या आपने कभी सोचा है कि आप कब सीधे पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं? एफआईआर (First Information Report) वही रिपोर्ट है जो किसी गंभीर अपराध — जैसे चोरी, हमला, डकैती, बलात्कार या हत्या — के बारे में पुलिस को पहली जानकारी देती है। अगर मामला 'कॉग्नाइज़ेबल' है, तो पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी ही होती है।

एफआईआर कब दर्ज होती है?

कॉग्नाइज़ेबल अपराध मतलब वह जिनके लिए पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकती है। अगर आप पीड़ित हैं या किसी गंभीर अपराध का साक्षी हैं तो मतदान, धमकी, पारिवारिक विवाद या छोटे सिविल मसलों के लिए पुलिस पहले नोटिस नहीं दर्ज करती—ऐसी शिकायतों को 'नॉन‑कॉग्नाइज़ेबल' कहा जाता है और उसके लिए मजिस्ट्रेट से आदेश चाहिए।

अगर पुलिस आपकी शिकायत दर्ज करने से मना करे, तो पहले SHO से बात करें, फिर डीएसपी/एसडीपीओ या सीनियर अधिकारियों को लिखित शिकायत दें। जरूरत पड़ने पर मजिस्ट्रेट या हाई‑कोर्ट में रिलीफ मिल सकता है।

एफआईआर दर्ज कराने का चरणबद्ध तरीका

1) पैक करें जरूरी चीजें: पहचान पत्र (Aadhaar/Voter/पासपोर्ट), घटना की तारीख‑समय, जगह, दोषियों के नाम/विवरण, और जो भी सबूत (फोटो, वीडियो, व्हाट्सऐप चैट)।

2) स्टेशन पहुंच कर शिष्ट भाषा में घटना बताएं। चाहें तो लिखित शिकायत सौंपें। यूनिक लॉग/रजिस्टर नंबर या कॉल इन‑रिकॉर्डिंग की रिक्वेस्ट करें—यह बाद में काम आएगा।

3) एफआईआर दर्ज होने पर उसका नंबर और कॉपी मांगें। कॉपी पर आपका नाम और दर्ज अधिकारी का नाम होना चाहिए। अगर तुरंत कॉपी नहीं दी जाती, तो लिखित रसीद लें।

4) ऑनलाइन विकल्प: कई राज्यों में ऑनलाइन एफआईआर पोर्टल हैं—लेकिन गंभीर मामलों में तुरंत नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाकर रिपोर्ट करें।

एफआईआर दर्ज होने के बाद हो क्या सकता है? पुलिस जांच शुरू करेगी, साक्ष्य जुटाएगी और जांच अधिकारी (IO) से संपर्क कराएगी। आप अपने वकील के साथ बात कर सकते हैं और अगर सुरक्षा की जरूरत हो तो पुलिस से अनुरोध कर सकते हैं।

कुछ बातें जिनसे बचें: किसी के विरुद्ध झूठी जानकारी देने से कानूनी जोखिम है। गलत या अधूरी जानकारी आप पर भी उल्टी पड़ सकती है।

अगर आप पीड़ित हैं, तो सबूत संभालें—जख्म की तस्वीर, मेडिकल रिपोर्ट, कॉल/मैसेज रिकॉर्ड और गवाहों के नाम सब बहुत महत्वपूर्ण हैं।

कभी‑कभी एफआईआर वापस लेना संभव नहीं होता; अगर आप शिकायत वापस लेना चाहें तो कोर्ट में आवेदन करना पड़ सकता है। पुलिस आमतौर पर एफआईआर 'रद्द' नहीं करती — वे जांच करके क्लोजर रिपोर्ट दे सकती हैं।

जरूरत पड़ी तो मुफ्त कानूनी सहायता लें या लोकल बार एसोसिएशन से संपर्क करें। सुरक्षा पहले है—अगर खतरा महसूस हो रहा है तो नजदीकी महिला थाने/नीजता हेल्पलाइन से तुरंत मदद लें।

एक छोटी सी बात याद रखें: जल्दी, सटीक और ठोस जानकारी देने से आपकी शिकायत तेज़ी से आगे बढ़ती है। किसी भी अनिश्चित स्थिति में पहले पुलिस को लिखित सूचना दें और एक कॉपी अपने पास रखें।

अगर आप चाहें, हम आपकी स्थिति के मुताबिक आसान चेकलिस्ट और फ़ॉर्मेट भी बता सकते हैं—बताइए किस तरह की घटना हुई, हम सरल कदम बता देंगे।

शाकिब अल हसन पर हत्या का आरोप, बांग्लादेश के अस्थिरता के दौरान 146 अन्य के साथ एफआईआर में शामिल
jignesha chavda 0 टिप्पणि

शाकिब अल हसन पर हत्या का आरोप, बांग्लादेश के अस्थिरता के दौरान 146 अन्य के साथ एफआईआर में शामिल

पूर्व बांग्लादेश कप्तान शाकिब अल हसन का नाम एक हत्या मामले में आया है। यह मामला अगस्त में ढाका के आदाबोर क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन में मोहम्मद रुबेल की मौत से जुड़ा है। रुबेल के पिता रफीकुल इस्लाम ने यह शिकायत दर्ज की है। शाकिब का नाम एफआईआर में 27वें या 28वें स्थान पर है।