Mauni Amavasya: क्या है और क्यों मनाते हैं?

क्या आपने कभी सुना है कि एक दिन की चुप्पी से मन को कितनी शांति मिल सकती है? Mauni Amavasya हिंदू कैलेंडर की मैघ मास की अमावस्या को कहते हैं। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते, मौन व्रत रखते और पूर्वजों के संतोष के लिए तर्पण करते हैं। यह दिन आत्म-शुद्धि, स्मृति और श्रद्धा का होता है।

Mauni Amavasya का धार्मिक महत्व

यह माना जाता है कि इस दिन किया गया स्नान और तर्पण पूर्वजों के पाप कम करने और परिवार की भलाई के लिए लाभदायक होता है। कई तीर्थस्थलों पर—जैसे प्रयागराज, हरिद्वार, वाराणसी—बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं। आम लोकमान्यताओं के अनुसार, इस दिन का पुण्य दूसरे दिनों से अधिक माना जाता है, इसलिए लोग दान, तप और सत्संग करते हैं।

मौन व्रत का उद्देश्य केवल चुप रहना नहीं, बल्कि बोलचाल से हटकर भीतर की सुनवाई को बढ़ाना है। आप ध्यान, प्रार्थना और सरल ध्यान अभ्यास करके इस दिन को ज्यादा लाभदायक बना सकते हैं।

कैसे मनाएं: आसान और व्यावहारिक तरीके

चाहे आप तीर्थयात्रा पर जा रहे हों या घर पर ही रहकर श्रद्धा प्रकट कर रहे हों, नीचे दिए कदम मददगार होंगे:

  • तिथि जाँचें: हर साल Mauni Amavasya की तारीख बदलती है। अपने स्थानीय पंचांग या कैलेंडर से तिथि और शुभ समय (मुहूर्त) चेक करें।
  • पवित्र स्नान: सुबह सूर्योदय से पहले या ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। अगर निकट कोई पवित्र नदी नहीं है, तो घर में साफ जल से स्नान कर सकतें हैं।
  • मौन व्रत: दिनभर मौन रखने का संकल्प लें—बोलने से बचें या सिर्फ आवश्यक बातें ही करें। कुछ लोग पूरे दिन केवल एक बार बोलते हैं या शाम तक मौन रखते हैं।
  • तर्पण और श्राद्ध: परिवार के पूर्वजों के लिए तर्पण और छोटा श्राद्ध कर सकते हैं। इसके लिए ताजा जल, तिल, दान और सरल प्रार्थना काफी है।
  • दान और सेवा: गरीबों को भोजन, कपड़े या आवश्यक वस्तुएँ देने से पुण्य बढ़ता है। मंदिरों या आश्रमों में सेवा भी की जा सकती है।

थोड़ा-सा आयोजन कर लें: नदी किनारे जाने पर भीड़ और ठंड का ध्यान रखें। जलवायु के अनुसार गरम कपड़े, प्राथमिक दवा और पहचान पत्र साथ रखें।

यदि आप बड़े मेला स्थान पर जा रहे हैं तो सुबह जल्दी निकलें, स्थानिक नियमों का पालन करें और प्लास्टिक का उपयोग कम रखें। अगर स्वास्थ्य कारणों से स्नान मुश्किल हो, तो घर पर ही श्रद्धा से स्नान और तर्पण कर लें—इसीमें भी पूजा समाहित है।

Mauni Amavasya अद्भुत रूप से साधारण है: थोड़ा मौन, एक शुद्ध स्नान, और अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा से किया गया काम। इसी से मन हल्का और परिवार सुखी रहता है। चाहें आप तीर्थ के लिए जाएं या घर पर, नियत सच्ची रखिए—यही सबसे बड़ा महत्व है।

Mauni Amavasya 2025: हरिद्वार में 50 साल बाद दुर्लभ त्रिवेणी योग, लाखों ने किया मौनस्नान
jignesha chavda 0 टिप्पणि

Mauni Amavasya 2025: हरिद्वार में 50 साल बाद दुर्लभ त्रिवेणी योग, लाखों ने किया मौनस्नान

2025 में माघ महीने की मौनी अमावस्या पर 50 साल बाद त्रिवेणी योग के साथ चार दुर्लभ संयोग बने। हरिद्वार के घाटों पर सुबह चार बजे से ही लाखों श्रद्धालु मौन रहकर गंगा स्नान और दान-दक्षिणा में जुटे। सर्द मौसम और हिमालय में बर्फबारी की चेतावनी के बावजूद भक्तों का उत्साह बना रहा।